मोहे मोर बनाइयो राधा भजन लिरिक्स- भजन (Mohe Mor Banaiyo Radha Apne Vranawan Ko  )

भजन गायक : Kratika Thaku

भजन टाइटल  :Mohe Mor Banaiyo Radha Apne Vranawan Ko

भजन के भाव :- वृन्दावन के भजन गायक चित्र विचित्र की आवाज में बहुत ही प्यारा दर्द भरा कृष्ण भजन - श्याम कब आओगे के पुरे हिंदी बोल देखे . भजन में श्याम को पुकारा जाता है और उनसे मिलने की विनती की जाती है . भजन गीतकार इस भजन से वृन्दावन की पावन भूमि पर किसी भी रूप में रहने का इच्छुक है क्योकि वो भूमि है राधा रानी की और श्याम प्यारे की .  वो इस भूमि की महानता को बहुत ज्यादा मानता है और यहा भिखारी बन कर भी अत्यंत खुश महसूस करेगा क्योकि उसे ब्रजवासियों की दिया हुआ खाने की मिलेगा जो की इस पावन धरती पर जन्मे है . 

Music & Composer: Bunty Thakur Singer : Kratika Thakur Additional Lyrics : Bunty Thakur 

Lyrics : Traditional 

Editing: Karan Thakur 

Recording Studio : Chitrankan Recording Studio 

Music Label : Bajao Bhakti Music


मोहे मोर बनाइयो राधा

राधा... राधा, राधा... राधा ॥

mohe mor banaiyo

 

मोहे मोर, बनईयो राधा, अपने वृंदावन को... ।

मैं नाच नाच, कूद के, तुमको रिझाऊँगी ।

मोहे बंदर, बनईयो तो, बनईयो सेवा कुँज को,

मैं कूद-फांद, ब्रज में, ज़ोर दिखाऊँगी ॥


मोहे भिक्षुक, बनईयो तो, बनईयो गोवर्धन को ।

मैं मांग मांग, टुक ब्रज, वासियों के खाऊँगी ।

मोहे रसिक, बनईयो तो, बनईयो बरसाने को,

मैं आठों याम, राधा राधा, राधा नाम गाऊँगी ॥

राधा... राधा, राधा... राधा ॥

राधा... राधा ॥


मोहे तिलक, बनईयो राधा, अपने मस्तक को ।

मैं तीनों, लोकों के, सर का, ताज़ बन जाऊँगी ।

मोहे कण्ठी, बनईयो राधा, अपने गले की,

मैं मीठो-मीठो, बोल जग, अपनो बनाऊँगी ॥


मोहे कंगन, बनईयो राधा, अपने हाथन को ।

मैं दुनिया में, सबसे, अनमोल कहलाऊँगी ।

मोहे पायल, बनईयो राधा, अपने पैरों की,
मैं छम-छम, कर सारा, ब्रज घूम आऊँगी ॥
राधा... राधा, राधा... राधा ॥
राधा... राधा ॥

मोहे लता, बनईयो राधा, अपने निधिवन की ।
मैं झूम झूम, कृष्ण राधा, रास देख पाऊँगी ।
मोहे जल, बनईयो तो, बनईयो यमुना जी को,
मैं ब्रज, भूमि में, अमृत छलकाऊँगी ॥


मोहे पेड़, बनईयो तो, बनईयो कदम को ।
मैं कान्हा के, संग मिल, चीर चुराऊँगी ।
मोहे कंकर, बनईयो तो, बनईयो नंद गाँव को,
मैं गोपियों की, मटकी फ़ोड़, माखन गिराऊँगी ॥
राधा... राधा, राधा... राधा ॥
राधा... राधा ॥



मोहे कोयल, बनईयो राधा, अपने बाग़ की ।
मैं दुनियाँ को, मीठो-मीठो, राग सुनाऊँगी ॥
मोहे फूल, बनईयो राधा, अपनी माला को,
मैं राधा, राधा बोल, सारा जग महकाऊँगी 


मोहे संत, बनईयो तो, बनईयो प्रेमानंद सो ।
मैं अपनो, जीवन, राधा नाम पे लुटाऊँगी ॥
मोहे दासी, बनियो राधा, अपने चरनन की,
मैं श्री, राधा नाम के, भजन गाऊँगी ॥
राधा... राधा, राधा... राधा ॥
राधा... राधा ॥




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